जन संकल्प
यह घोषणापत्र हमने नहीं लिखा। आपने भेजा।
पुरानी राजनीति में घोषणापत्र एक कमरे में लिखा जाता है, चुनाव से पहले बँटता है, और जीतते ही ग़ायब हो जाता है। यहाँ उल्टा है। नीचे का हर संकल्प आपके भेजे सपनों और उठाए मुद्दों से गिनकर बना है। हम वादा नहीं लिख रहे, हम आपकी आवाज़ गिन रहे हैं।
साफ़ बात: यह कोई वादा नहीं है। हमारी इकलौती बाध्यकारी प्रतिबद्धता हर उम्मीदवार का विकास कॉन्ट्रैक्ट है। जिस संकल्प को लोग सबसे ज़्यादा पीछे खड़े होकर समर्थन देंगे, वही उस कॉन्ट्रैक्ट का काम बन जाएगा।
लोगों का संकल्प
हर संकल्प के साथ वो गिनती है जो उसे आपके भेजे सपनों और मुद्दों से मिली। समर्थन दें, ताकि साफ़ दिखे कि किस बात के पीछे सबसे ज़्यादा लोग खड़े हैं।
अब तक इन संकल्पों को आकार देने वाली आवाज़ें
हर मोर्चे की असली हालत नीचे एक नज़र में। किसी पर भी टैप करें: हमारा प्लान और अपनी आवाज़ जोड़ें।
नौकरी और रोज़गार
सबसे ज़्यादा समर्थनदेश में करीब 2.5 करोड़ युवा काम का इंतज़ार कर रहे हैं।
हर हाथ को काम, और हर छोटे कारोबार को बढ़ने का मौक़ा।
1असली हालत · स्रोत: CMIE, 2022-23 ↗जीते तो कॉन्ट्रैक्ट यह बाँधेगा
- पहले 100 दिन में: इलाक़े में कितने लोग काम की तलाश में हैं और किन भर्तियों पर रोक है, इसकी खुली गिनती सबके सामने।
- हर छोटे कारोबार के लाइसेंस और मंज़ूरी में कितने दिन लगते हैं, यह एक सार्वजनिक ट्रैकर पर, हर देरी की तय समय-सीमा के साथ।
- हर 90 दिन में सार्वजनिक हिसाब: कितने लोग काम और हुनर से जुड़े, कितने कारोबार खुले, क्या अब भी अटका है।
5सपने0मुद्दे4जगहेंइतनी आवाज़ें इस पर आईं
यह कहाँ से आया: नौकरी और छोटे कारोबार से जुड़े सपने और मुद्दे
अपनी आवाज़ इसमें जोड़ें
किसी लॉगिन की ज़रूरत नहीं। आपका सपना और मुद्दा सीधे इस गिनती में जुड़ता है।
1 सदस्य साथकिसान और खेती
औसत किसान परिवार की मासिक आय सिर्फ़ ₹10,218 है, और 50% से ज़्यादा किसान परिवार क़र्ज़ में डूबे हैं।
किसान को उसकी मेहनत का सही दाम, और क़र्ज़ के जाल से निकलने का रास्ता।
1असली हालत · स्रोत: NSS 77वाँ दौर (NSO), 2019 ↗जीते तो कॉन्ट्रैक्ट यह बाँधेगा
- पहले 100 दिन में: इलाक़े की मंडी के दाम और MSP का खुला फ़र्क़, और किसानों के कितने भुगतान अटके हैं, सब सार्वजनिक।
- किसानों को बकाया भुगतान और फ़सल-नुक़सान के दावों का सार्वजनिक ट्रैकर, हर देरी की तय समय-सीमा के साथ।
- हर 90 दिन में सार्वजनिक हिसाब: कितने किसानों को सही दाम और समय पर भुगतान मिला, और क्या अब भी अटका है।
अभी इस पर कोई सपना या मुद्दा नहीं आया। पहले आप जोड़ें।
यह कहाँ से आया: खेती और किसान से जुड़े मुद्दे
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1 सदस्य साथघर और बुनियादी सुविधाएँ
शहरों में 6.5 करोड़ से ज़्यादा लोग झुग्गियों में रहते हैं (शहरी आबादी का 17%), और 71% झुग्गी बस्तियों में भूमिगत सीवर तक नहीं।
हर परिवार के सिर पर पक्की छत, और हर बस्ती में पानी, शौचालय और नाली।
1असली हालत · स्रोत: जनगणना 2011 (NBO) ↗जीते तो कॉन्ट्रैक्ट यह बाँधेगा
- पहले 100 दिन में: इलाक़े के कच्चे घरों और बस्तियों में पानी, शौचालय व नाली की कमी की खुली गिनती, सब नक़्शे पर।
- मंज़ूर बनाम सच में बने घरों का सार्वजनिक ट्रैकर, ताकि 'मंज़ूरी' और 'बनकर तैयार' के बीच का फ़र्क़ छुप न सके।
- हर 90 दिन में सार्वजनिक हिसाब: कितने घरों और बस्तियों तक बुनियादी सुविधाएँ पहुँचीं, और कहाँ अब भी कमी है।
अभी इस पर कोई सपना या मुद्दा नहीं आया। पहले आप जोड़ें।
यह कहाँ से आया: घर, झुग्गी और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे
अपनी आवाज़ इसमें जोड़ें
किसी लॉगिन की ज़रूरत नहीं। आपका सपना और मुद्दा सीधे इस गिनती में जुड़ता है।
1 सदस्य साथसबके लिए इलाज
इलाज के ख़र्च ने करीब 9.7 करोड़ भारतीयों को ग़रीबी में धकेला, और सबसे बड़ा बोझ रोज़ की OPD फ़ीस है, बड़े अस्पताल का बिल नहीं।
पास का अस्पताल जो चलता हो, और इलाज जो परिवार को क़र्ज़ में न डाले।
असली हालत · स्रोत: समीक्षित अध्ययन (NIH) ↗जीते तो कॉन्ट्रैक्ट यह बाँधेगा
- पहले 100 दिन में: पास के सरकारी अस्पताल की खुली जाँच, कितने डॉक्टर, कितनी दवा और कौन-सी मशीन सच में चालू है, सब सार्वजनिक।
- एक सार्वजनिक ट्रैकर, जहाँ कोई भी देख सके कि अस्पताल में आज कौन-सी ज़रूरी दवा और जाँच मौजूद है, ताकि कोई परिवार महँगे इलाज में क़र्ज़ न ले।
- हर 90 दिन में सार्वजनिक हिसाब: कितने मरीज़ों को इलाज मिला, कौन-सी कमी रही, और हर कमी कब तक ठीक होगी।
1सपने0मुद्दे1जगहेंइतनी आवाज़ें इस पर आईं
यह कहाँ से आया: स्वास्थ्य और अस्पताल से जुड़े सपने और मुद्दे
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किसी लॉगिन की ज़रूरत नहीं। आपका सपना और मुद्दा सीधे इस गिनती में जुड़ता है।
अभी कोई समर्थन नहीं। पहले आप बनें।सड़क, बिजली और सफ़र
हर 3 में से 2 ग्रामीण और हर 5 में से 2 शहरी घर रोज़ कम-से-कम एक बार बिजली कटौती झेलते हैं।
चलने लायक़ सड़कें, भरोसेमंद बिजली, और सस्ता-सुरक्षित सार्वजनिक सफ़र।
असली हालत · स्रोत: CEEW IRES, 2020 ↗जीते तो कॉन्ट्रैक्ट यह बाँधेगा
- पहले 100 दिन में: इलाक़े की टूटी सड़कों, गड्ढों और बिजली कटौती की खुली सूची, कहाँ सबसे ख़राब हालत है, सब सार्वजनिक।
- बिजली कब-कब और कितनी देर जाती है, यह नापकर एक सार्वजनिक रिकॉर्ड पर, ताकि बहाने नहीं, सच्चे आँकड़े सामने रहें।
- हर 90 दिन में सार्वजनिक हिसाब: कितनी सड़कें ठीक हुईं, बिजली कितनी भरोसेमंद हुई, और सार्वजनिक सफ़र कहाँ बेहतर हुआ।
0सपने1मुद्दे0जगहेंइतनी आवाज़ें इस पर आईं
यह कहाँ से आया: सड़क, बिजली और सार्वजनिक सफ़र से जुड़े सपने और मुद्दे
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किसी लॉगिन की ज़रूरत नहीं। आपका सपना और मुद्दा सीधे इस गिनती में जुड़ता है।
अभी कोई समर्थन नहीं। पहले आप बनें।पानी और साफ़ माहौल
2011 की जनगणना में झुग्गियों के 34% घरों में शौचालय तक नहीं था, और करीब 19% लोग खुले में शौच करते थे।
हर घर तक साफ़ पानी, और हर मोहल्ले में साफ़-सफ़ाई।
असली हालत · स्रोत: जनगणना 2011 (NBO) ↗जीते तो कॉन्ट्रैक्ट यह बाँधेगा
- पहले 100 दिन में: इलाक़े के पानी की खुली जाँच, किन घरों और मोहल्लों तक साफ़ पानी नहीं पहुँचता, यह नक़्शे पर साफ़ दिखे।
- कूड़ा उठाने और नालियों की सफ़ाई का तय शेड्यूल सार्वजनिक हो, और कोई भी देख सके कि उसके इलाक़े में काम सच में हुआ या नहीं।
- हर 90 दिन में सार्वजनिक हिसाब: कितने नए घरों तक साफ़ पानी पहुँचा और कौन-से मोहल्ले अब भी छूटे हैं।
अभी इस पर कोई सपना या मुद्दा नहीं आया। पहले आप जोड़ें।
यह कहाँ से आया: पानी और सफ़ाई से जुड़े सपने और मुद्दे
अपनी आवाज़ इसमें जोड़ें
किसी लॉगिन की ज़रूरत नहीं। आपका सपना और मुद्दा सीधे इस गिनती में जुड़ता है।
अभी कोई समर्थन नहीं। पहले आप बनें।अच्छे स्कूल
सरकारी स्कूल में कक्षा 3 के सिर्फ़ 23% बच्चे कक्षा 2 का पाठ पढ़ पाते हैं।
हर बच्चे को ऐसी शिक्षा जो उसके भविष्य के लायक़ हो।
असली हालत · स्रोत: ASER 2024 ↗जीते तो कॉन्ट्रैक्ट यह बाँधेगा
- पहले 100 दिन में: सरकारी स्कूलों की खुली जाँच, कितने शिक्षक तैनात हैं, कितने पद ख़ाली हैं, और शौचालय व पानी चालू हैं या नहीं।
- हर स्कूल में शिक्षकों की उपस्थिति का सार्वजनिक रिकॉर्ड, ताकि माता-पिता देख सकें कि पढ़ाने वाला रोज़ सच में आता है या नहीं।
- हर 90 दिन में सार्वजनिक हिसाब: कितने ख़ाली शिक्षक पद भरे गए और किन स्कूलों में अब भी कमी बाक़ी है।
अभी इस पर कोई सपना या मुद्दा नहीं आया। पहले आप जोड़ें।
यह कहाँ से आया: स्कूल और शिक्षा से जुड़े सपने और मुद्दे
अपनी आवाज़ इसमें जोड़ें
किसी लॉगिन की ज़रूरत नहीं। आपका सपना और मुद्दा सीधे इस गिनती में जुड़ता है।
अभी कोई समर्थन नहीं। पहले आप बनें।सुरक्षा, ख़ासकर महिलाओं के लिए
2022 में महिलाओं के ख़िलाफ़ 4.45 लाख से ज़्यादा अपराध दर्ज हुए, पर सज़ा सिर्फ़ 25% मामलों में हुई।
ऐसी गली और शहर जहाँ हर कोई, ख़ासकर बेटियाँ, बिना डर के निकल सकें।
असली हालत · स्रोत: NCRB, 2022 ↗जीते तो कॉन्ट्रैक्ट यह बाँधेगा
- पहले 100 दिन में: उन जगहों की खुली पहचान जहाँ बेटियाँ असुरक्षित महसूस करती हैं, अँधेरी गलियाँ और सूनसान रास्ते, ख़ासकर महिलाओं से पूछकर, सब नक़्शे पर।
- उन जगहों पर स्ट्रीटलाइट लगने और ठीक होने की तय समय-सीमा सार्वजनिक हो, और लोग हर जगह पूरा होने पर निशान लगा सकें।
- हर 90 दिन में सार्वजनिक हिसाब: कितनी असुरक्षित जगहें रोशन और सुरक्षित हुईं, और महिलाओं की शिकायतों पर कितनी जल्दी कार्रवाई हुई।
अभी इस पर कोई सपना या मुद्दा नहीं आया। पहले आप जोड़ें।
यह कहाँ से आया: सुरक्षा और महिला सुरक्षा से जुड़े सपने और मुद्दे
अपनी आवाज़ इसमें जोड़ें
किसी लॉगिन की ज़रूरत नहीं। आपका सपना और मुद्दा सीधे इस गिनती में जुड़ता है।
अभी कोई समर्थन नहीं। पहले आप बनें।साँस लेने लायक़ हवा
दुनिया के 9 सबसे प्रदूषित शहरों में से 6 भारत में हैं, और हमारी हवा में PM2.5 WHO की सीमा से 10 गुना ज़्यादा है।
हर मौसम में साफ़ हवा, ताकि बच्चे और बुज़ुर्ग बिना डर के साँस ले सकें।
असली हालत · स्रोत: IQAir, 2024 ↗जीते तो कॉन्ट्रैक्ट यह बाँधेगा
- पहले 100 दिन में: इलाक़े की हवा की गुणवत्ता (AQI) की खुली नाप और सबसे बड़े प्रदूषण स्रोतों की पहचान, सब सार्वजनिक।
- एक सार्वजनिक AQI ट्रैकर, जहाँ कोई भी रोज़ देख सके कि उसके इलाक़े की हवा कितनी साफ़ है।
- हर 90 दिन में सार्वजनिक हिसाब: कौन-से प्रदूषण स्रोत घटे, कहाँ हवा बेहतर हुई, और क्या अब भी बाक़ी है।
अभी इस पर कोई सपना या मुद्दा नहीं आया। पहले आप जोड़ें।
यह कहाँ से आया: हवा, प्रदूषण और साफ़ माहौल से जुड़े सपने और मुद्दे
अपनी आवाज़ इसमें जोड़ें
किसी लॉगिन की ज़रूरत नहीं। आपका सपना और मुद्दा सीधे इस गिनती में जुड़ता है।
अभी कोई समर्थन नहीं। पहले आप बनें।
समर्थन देने के लिए सदस्य के तौर पर लॉगिन करें। आपका वोट हर किसी के बराबर गिना जाता है।
पहली बार, एक घोषणापत्र जो किसी पार्टी का नहीं, आपका है।
इस पन्ने को कैसे पढ़ें
- 1पार्टी यहाँ कुछ नहीं लिखती। यह असली सपनों और मुद्दों की गिनती है।
- 2इकलौता बाध्यकारी वादा हर उम्मीदवार का विकास कॉन्ट्रैक्ट है, जो यहीं से दिशा लेता है।
- 3हर संख्या असली डेटा से है। जहाँ अभी कुछ नहीं आया, वहाँ ईमानदारी से ख़ाली दिखता है।
असली समस्या इन मुद्दों से भी गहरी है
हर मुद्दे के नीचे एक ही टूटी चीज़ है: वो जवाबदेही जो इन्हें ठीक नहीं होने देती। 39% राज्य राजधानियों के पास कोई एक्टिव मास्टर प्लान तक नहीं, और नागरिक वॉर्ड कमिटियाँ ज़्यादातर सिर्फ़ काग़ज़ पर रह जाती हैं। वही टूटी परत, जहाँ जनता की निगरानी होनी चाहिए, हम दोबारा बनाते हैं।
स्रोत: Janaagraha ASICS 2023 ↗हर बदलाव, हमेशा रिकॉर्ड पर
पुरानी राजनीति की सबसे बड़ी चालाकी: घोषणापत्र चुपचाप बदल जाता है, पुराना वर्शन ग़ायब। यहाँ ऐसा नहीं हो सकता। जब भी कोई संकल्प बदलेगा, पुराना वर्शन रिकॉर्ड पर रहेगा, मिटाया नहीं जाएगा। यह कोई वादा नहीं, यह हम पहले ही कर के दिखा चुके हैं।
देखें: फंडिंग का नियम हमने सबके सामने पलटा, और पुराना वर्शन रिकॉर्ड पर छोड़ दिया।
वो बदलाव फ़ैसलों के लॉग में देखें →आगे जैसे-जैसे हम बढ़ेंगे, हर संशोधन सदस्यों के गुप्त मतदान से होगा, और हर वर्शन यहीं पक्का रिकॉर्ड बनेगा।
संकल्प बदलने के प्रस्ताव
जैसे-जैसे हम बढ़ेंगेअभी कोई प्रस्ताव खुला नहीं है। जब हम काफ़ी सदस्य हो जाएँगे, पहला प्रस्ताव कोई सदस्य ही रखेगा। वो आप हो सकते हैं।
संशोधन ऊपर से थोपे नहीं जाते। हर बदलाव सदस्यों के गुप्त मतदान से तय होगा, नतीजा सबके सामने। यह व्यवस्था बन रही है, आज दिखावे के लिए चालू नहीं की गई।
जो कभी नहीं बदलेगा
संकल्प बदल सकते हैं, पर कुछ नियम संस्थापक पर भी हमेशा के लिए बँधे हैं। इन्हें यह मतदान भी नहीं बदल सकता।
ये बाध्यकारी वादे पढ़ें →ये भी देखें: सब कुछ खुद जाँचें